विराट अपहरण कांड; विराट अपहरण कांड में दोषियों को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रखी बरकरार
बिलासपुर के चर्चित विराट अपहरण मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि फिरौती के लिए बच्चों का अपहरण बेहद गंभीर अपराध है, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बनता है।

यह मामला साल 2019 का है, जब कारोबारी विवेक सराफ के 6 वर्षीय बेटे विराट सराफ का उनके घर के सामने से अपहरण कर लिया गया था। घटना के बाद अपहरणकर्ताओं ने बच्चे की रिहाई के बदले करोड़ों रुपये की फिरौती मांगी थी।
बच्चे के लापता होने के बाद पुलिस ने लगातार कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया और आखिरकार विराट को सुरक्षित बरामद कर लिया। इसके साथ ही अपहरण में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ था कि इस पूरे षड्यंत्र की मुख्य साजिशकर्ता बच्चे की बड़ी मां नीता सराफ थी। पुलिस जांच में सामने आया कि वह भारी कर्ज में डूबी हुई थी और पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर इस सनसनीखेज वारदात की योजना बनाई थी।
मामले की जांच के दौरान पुलिस और जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट और वॉयस सैंपल जैसे तकनीकी सबूत जुटाए थे। ट्रायल के दौरान कई अहम गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए, जिससे यह साबित हुआ कि पूरी वारदात पहले से बनाई गई साजिश के तहत अंजाम दी गई थी।

करीब दो साल पहले निचली अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि दोषियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध समाज के लिए बेहद खतरनाक हैं और ऐसे मामलों में सख्त सजा ही न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कायम रख सकती है।









